रेवाड़ी (Rewari): रेवाड़ी नगर परिषद (Municipal Council) ने शहर के मुख्य चौराहों और सर्कुलर रोड पर लगी खराब सुल्तान स्ट्रीट लाइट्स (Sultan street lights) की मरम्मत के लिए करीब नौ लाख रुपये का अनुमान तैयार किया है।
दिलचस्प बात यह है कि ये लाइट्स और पोल्स (poles) कुल मिलाकर पांच करोड़ रुपये की लागत से लगाए गए थे। लेकिन अब लंबे समय से खराब पड़े होने की वजह से शहर की सड़कें अंधेरे में हैं और दुर्घटना व अपराध का खतरा बढ़ गया है।
वित्त समिति से मंजूरी के बाद शुरू होगा टेंडर
नगर परिषद ने इस मरम्मत का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। वित्त समिति (Finance Committee) से अनुमोदन मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया (tender process) शुरू की जाएगी।

नगर परिषद की अध्यक्ष पूनम यादव ने बताया कि मंजूरी मिलते ही जल्द टेंडर जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद शहर की मुख्य सड़कें और चौराहे फिर से रोशन होंगे।
PWD ने लगाई थी, नगर परिषद को सौंपी गई
ये सुल्तान लाइट्स पहले पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (Public Works Department – PWD) द्वारा स्थापित की गई थीं और बाद में नगर परिषद को सौंप दी गई थीं।
शुरुआत में ये लाइट्स अच्छी तरह से काम कर रही थीं, लेकिन समय के साथ कई जगहों पर इनकी हालत बिगड़ती गई। नियमित देखभाल न होने के कारण ये बार-बार खराब होती रहीं।
कहां-कहां लगी हैं ये लाइट्स?
सुल्तान स्ट्रीट लाइट्स शहर के कई अहम इलाकों में स्थापित की गई थीं:
- सर्कुलर रोड (Circular Road)
- गढ़ी बोलनी रोड
- अंबेडकर चौक से NH-8 तक
- झज्जर रोड (Jhajjar Road)
- महेंद्रगढ़ रोड
- भड़ावास रोड
इनके अलावा नए अनाज बाजार रोड, दिल्ली रोड और गढ़ी बोलनी की कई लाइट्स लंबे समय से काम नहीं कर रही हैं।
अंधेरे में सड़कें, बढ़े अपराध
लाइट्स खराब होने से सड़कें पूरी तरह अंधेरे में डूब गई हैं। इससे दो बड़ी समस्याएं पैदा हुई हैं।
पहली – सड़क दुर्घटनाओं (road accidents) की संभावना बढ़ गई है। दूसरी – शहर में अपराध की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है।
अंधेरे में अपराधियों को मौका मिल जाता है और नागरिकों की सुरक्षा (safety) खतरे में आ गई है।
राइट टू सर्विस कमीशन में हुई शिकायत
स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद से बार-बार अनुरोध किया कि लाइट्स की मरम्मत करवाई जाए। लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो अंततः हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन (Haryana Right to Service Commission) में शिकायत दर्ज करानी पड़ी।
इसके बाद नगर परिषद हरकत में आई और मरम्मत का अनुमान तैयार किया गया।
हर साल टेंडर, लेकिन ढाक के तीन पात
मजेदार बात यह है कि इन सुल्तान लाइट्स की मरम्मत के लिए हर साल टेंडर तो जारी किए जाते हैं, लेकिन नियमित देखभाल न होने के कारण ये बार-बार खराब हो जाती हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या इस बार मरम्मत के बाद इनकी नियमित देखभाल का कोई इंतजाम होगा या ये फिर से वही ढाक के तीन पात वाली कहानी होगी?
निवासियों को उम्मीद
स्थानीय निवासी विवेक भट्टोटिया ने कहा, “लाइट्स की स्थिति में सुधार से न केवल सड़कें सुरक्षित होंगी बल्कि अपराध की घटनाओं पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा।”
अब देखना यह है कि नगर परिषद इस बार मरम्मत के साथ-साथ इन लाइट्स की देखभाल का भी कोई ठोस इंतजाम करती है या नहीं। वरना पांच करोड़ की ये लाइट्स फिर से अंधेरे में गुम हो जाएंगी।









