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गीता महोत्सव में विधायक का संदेश: कर्म करो, फल की चिंता छोड़ो — ये सिर्फ किताब नहीं, जीवन जीने की राह है

Haryana News: बवानी खेड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक कपूर वाल्मीकी (Kapoor Valmiki, MLA) ने शनिवार को कहा कि श्रीमद्भागवत गीता (Shrimad Bhagavad Gita) सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ भर नहीं है — यह तो जीवन जीने का असली मार्गदर्शक है। किरोड़ीमल पार्क (Kirodimel Park) में चल रहे तीन दिवसीय जिला स्तरीय अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए उन्होंने गीता के उपदेशों को मानव जीवन का सार और आधार बताया।

‘कर्म करो, फल की चिंता मत करो’ — भगवान कृष्ण का संदेश आज भी प्रासंगिक

विधायक वाल्मीकी ने भगवान कृष्ण (Lord Krishna) के उस मशहूर उपदेश का जिक्र किया जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है — ‘कर्म करो, फल की चिंता मत करो’। उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत हमें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करता है और बिना परिणाम की फिक्र किए अपने काम में डूब जाने की प्रेरणा देता है।

“गीता केवल व्यक्तिगत जीवन को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र निर्माण (nation building) में भी अहम भूमिका निभाती है,” उन्होंने जोर देकर कहा।

स्टॉल्स का अवलोकन और हवन यज्ञ में शिरकत

कार्यक्रम की शुरुआत में विधायक कपूर वाल्मीकी ने विभिन्न सरकारी विभागों और सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं (socio-religious organizations) द्वारा लगाई गई स्टॉलों का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने हवन यज्ञ (Hawan Yagya) में पूर्ण आहुति डालकर श्रीमद्भागवत का पूजन भी किया। पूरा माहौल भक्ति और आस्था से सराबोर था।

केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों की तारीफ

विधायक ने केंद्र और राज्य सरकारों (Central and State Governments) की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Chief Minister Nayab Singh Saini) के नेतृत्व में गीता के महत्व को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ले जाने के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि मानव कल्याण (human welfare) के लिए गीता के सिद्धांतों को सही मायनों में आत्मसात किया जा रहा है और इसी रास्ते पर चलकर समाज को नई दिशा मिल सकती है।

स्वदेशी अपनाओ, विकसित भारत बनाओ

विधायक वाल्मीकी ने स्वदेशी (Swadeshi) को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत (Viksit Bharat) की परिकल्पना तभी साकार होगी जब हम अपनी देसी वस्तुओं का इस्तेमाल करेंगे और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेंगे।

“सच्चाई, धर्म और कर्तव्यनिष्ठा (truthfulness, righteousness and dedication to duty) के साथ अगर हम गीता के मार्ग पर चलें, तो जीवन को सफल बनाने के साथ-साथ समाज को भी सही दिशा दे सकते हैं,” उन्होंने आह्वान किया।

डीएमसी गुलजार मलिक ने दी स्मृति चिन्ह

कार्यक्रम के समापन पर डीएमसी गुलजार मलिक (DMC Gulzar Malik) ने विधायक कपूर वाल्मीकी को गीता की एक प्रति और स्मृति चिन्ह (memento) भेंट कर सम्मानित किया। पूरे कार्यक्रम का संचालन सुमन बुंदेला (Suman Bundela) ने किया, जिन्होंने मंच को सहजता से संभाला।

तीन दिवसीय महोत्सव में स्थानीय लोगों की जबरदस्त भागीदारी देखी जा रही है। आयोजकों का कहना है कि यह महोत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना जगाने का माध्यम भी है।

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