- विराट कोहली की 2025 परफॉर्मेंस ने ODI चयन में बहस खत्म कर दी।
- न्यूज़ीलैंड सीरीज़ में रोहित-कोहली की जगह लगभग तय मानी जा रही है।
- 651 रनों और तीन शतकों के बाद फिटनेस व फॉर्म दोनों पर सवाल नहीं बचे।
- 2026 में भारत अनुभव और युवाओं का संतुलन इसी धुरी पर साधेगा।
भारत के ODI स्क्वाड के चयन से पहले एक दिलचस्प सन्नाटा है। चयनकर्ता बातचीत कर रहे हैं, फाइलें पलट रही हैं पर कुछ नाम ऐसे हैं जिन पर चर्चा की ज़रूरत ही नहीं पड़ रही। विराट कोहली और रोहित शर्मा।
इन दो नामों को लेकर न तो कोई बहस हो रही है ओर न किसी प्लान B की फुसफुसाहट सुनाई देती है।
क्यों है आज भी विराट सबसे बड़ा भरोसा
37 की उम्र में ज्यादातर खिलाड़ी रफ्तार धीमी कर देते हैं पर कोहली का कैलेंडर 2025 उल्टी दिशा में भागता दिखा। उन्होंने इस साल 651 ODI रन बनाए। तीन शतक, चार फिफ्टी और 65.10 की औसत। आंकड़े सिर्फ आंकड़े नहीं रहे बल्कि सवालों के जवाब बन गए।

इस दौरान उनकी बल्लेबाज़ी का पैटर्न भी वैसा ही रहा जैसा पहले होता था। पावरप्ले में गैप खोजकर दबाव बनाना, बीच के ओवर्स में गेंद की लाइन समझकर स्ट्राइक रोटेट करना और जैसे-जैसे मैच आगे बढ़े वैसे वैसे विपक्षी गेंदबाज़ों का दम घोंटना आदि इन्होंने अभी भी बखूबी किया है।
नया युग में नए मापदंड होंगे लेकिन कोहली फिट है
मौजूदा समय में सेलेक्शन कमेटी अब सिर्फ रनों को नहीं बल्कि इम्पैक्ट को तौलती है। वो देखती है कि बल्लेबाज़ प्रेशर में कितना टिकता है, मुश्किल पिचों पर कितनी देर नियंत्रण में रहता है और क्या उसकी उपस्थिति टीम के आत्मविश्वास को ऊपर खींचती है।
कोहली के लिए यह हिस्सा आसान लगता है।
खराब गेंद का इंतज़ार, बाउंसरों से बचाव, इनसाइड एज से बचते हुए बीच में शॉट मिलना यह सब बताता है कि वो सिर्फ रन नहीं बनाते बल्कि मैच को डिज़ाइन करते हैं।
घरेलू मैदान से लेकर ड्रेसिंग रूम तक कोहली का प्रभाव
कोहली जब विजय हजारे ट्रॉफी खेल रहे थे तो उस मैच का प्रसारण नहीं हुआ पर जिस दिन उन्होंने शतक लगा दिया उसी दिन इंटरनेट पर लोग सिर्फ एक चीज़ ढूंढ रहे थे कि स्कोरकार्ड कहां है।
Google Trends में उनका नाम एकदम रफ़्तार के साथ ऊंचाई छू रहा था। यह सिर्फ लोकप्रियता नहीं बल्कि एक ऐसे खिलाड़ी की वापसी की भूख थी जिसे लोग भूलना नहीं चाहते।
2026 के लिए क्या संकेत मिल रहे है?
आने वाले साल में सबसे पहले न्यूज़ीलैंड सीरीज़ 11 जनवरी से शुरू हो रही है। वहीं इंग्लैंड दौरा 14 जुलाई से शुरू हो जायेगा। 2027 वर्ल्ड कप तो अभी काफी दूर है पर सफ़र की शुरुआत यहीं से करनी होगी। भारत युवा और अनुभव के बीच संतुलन खोज रहा है ओर इसकी तलाश अब तेज हो गई है क्योंकि कोहली जैसे खिलाड़ी इस संतुलन को दिशा देते हैं।
क्रिकेट में रणनीति सिर्फ रन बनाने की नहीं बल्कि प्रजेंस ऑफ माइंड की भी होती है। भारत को फिर एक स्थिर मध्य क्रम चाहिए और जब तक विराट कोहली क्रीज पर मौजूद हैं तब तक टीम भागते हुए मैच नहीं बल्कि चलते हुए जीत की तरफ बढ़ती महसूस होती है।









