Haryana News: हरियाणा में आवारा गोवंश (Stray Cattle) की समस्या से निपटने के लिए अब सरकार एक बार फिर मैदान में उतर रही है। 1 दिसंबर से राज्य के पांच जिलों में विशेष अभियान शुरू होगा, जिसमें सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में भेजा जाएगा।
इस पहल की जरूरत इसलिए महसूस की गई क्योंकि प्रदेश में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में आवारा गोवंश की भूमिका अहम रही है। हालांकि अच्छी बात यह है कि तीन-चार साल पहले जहां सड़कों पर डेढ़ से दो लाख गोवंश भटकते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 30 से 35 हजार रह गई है।
सोनीपत, जींद, पानीपत, कैथल और हिसार में पहली बारी
हरियाणा गो सेवा आयोग (Haryana Gau Seva Aayog) के चेयरमैन श्रवण गर्ग ने बताया कि 1 दिसंबर से सबसे पहले सोनीपत, जींद, पानीपत, कैथल और हिसार जिलों में काम शुरू होगा। इन पांच जिलों में स्थानीय निकायों और प्रशासन के साथ मिलकर गोवंश पकड़ने की मुहिम चलाई जाएगी।
“हमने इन जिलों के साथ पहले से समन्वय बैठकें कर ली हैं। एजेंसियां और गोशालाएं मिलकर सड़कों से पशुओं को पकड़ेंगी,” गर्ग ने कहा।
पहले चरण के बाद शेष जिलों में भी यही अभियान दोहराया जाएगा। प्रदेश में कुल 87 निकाय हैं, और सर्दियों के मौसम में सभी जगह यह मुहिम चलेगी।
पकड़े गए पशुओं का क्या होगा?
जो भी गोवंश पकड़े जाएंगे, उन्हें सीधे गोशालाओं में भेजा जाएगा। वहां पशु पालन विभाग (Animal Husbandry Department) की टीमें हर पशु की टैगिंग करेंगी। इस टैग में गोशाला का नाम, निकाय, शहर और जिले का कोड दर्ज होगा, जिससे पशु की पहचान और ट्रैकिंग आसान हो सके।
इसके साथ ही हर बेसहारा पशु को मुंह-खुरपका रोग (Foot and Mouth Disease) की वैक्सीन भी दी जाएगी।
गाय से लेकर बछड़े तक के अलग-अलग रेट
सरकार ने गोवंश पकड़ने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए राशि भी तय की है। रजिस्ट्रेड गौशाला में पहुंचाने पर ये प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। चेयरमैन श्रवण गर्ग के मुताबिक:
- नंदी (बैल) पकड़ने पर: 800 रुपये प्रति पशु
- गाय पकड़ने पर: 600 रुपये प्रति पशु
- गोवंश के बच्चे पकड़ने पर: 300 रुपये प्रति बच्चा
यह योजना गोशालाओं और एजेंसियों को काम में तेजी लाने के लिए बनाई गई है।
694 गोशालाओं में पहले से ही 4 लाख गोवंश
प्रदेश में फिलहाल 694 पंजीकृत गोशालाएं (Registered Gaushalas) हैं, जिनमें करीब 4 लाख गोवंश पहले से मौजूद हैं। इन गोशालाओं को चलाने के लिए सरकार समय-समय पर अनुदान (Grant) देती रहती है।
31 मार्च 2025 तक गोशाला संचालकों को 88.54 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जा चुका है। अब अप्रैल से सितंबर 2025 तक की अवधि के लिए आवेदन मांगे गए हैं। रविवार तक गोशाला संचालकों ने अपना ब्योरा दर्ज करा दिया है। सत्यापन के बाद उन्हें नया अनुदान मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बेसहारा पशुओं को सड़कों से हटाकर गोशालाओं में रखने के आदेश दिए हैं। इसी तरह आवारा कुत्तों को भी पकड़कर आश्रय स्थलों (Shelters) में भेजने के निर्देश हैं।
इसी के मद्देनजर शहरी स्थानीय निकाय विभाग, पशु पालन विभाग, राज्य परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और हरियाणा गो सेवा आयोग मिलकर संयुक्त अभियान चला रहे हैं।
सड़क सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम पर जोर
आवारा गोवंश सड़क हादसों का एक बड़ा कारण रहा है, खासतौर पर राष्ट्रीय राजमार्गों (National Highways) और व्यस्त मार्गों पर। रात के समय अचानक सड़क पर आ जाने वाले पशुओं की वजह से कई बार जानलेवा हादसे हो जाते हैं।
विभाग का मानना है कि अगर समय रहते इन पशुओं को सड़कों से हटा दिया जाए, तो दुर्घटनाओं में काफी कमी आ सकती है।
नोट: यह अभियान सर्दियों के मौसम में विशेष रूप से चलाया जा रहा है क्योंकि इस दौरान पशुओं का आवागमन ज्यादा होता है और सड़क हादसों की आशंका भी बढ़ जाती है।










