Haryana News: हरियाणा के एक 44 वर्षीय शख्स के परिवार ने दुख की सबसे मुश्किल घड़ी में जो फैसला लिया, वो सिर्फ एक नहीं बल्कि पांच परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन गया। गंभीर सिर की चोट (head injury) के बाद 23 नवंबर को पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती हुए मरीज को डॉक्टरों ने तमाम कोशिशों के बावजूद 27 नवंबर को ब्रेन डेड (brain dead) घोषित कर दिया।
लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी। कम से कम उस तरीके से नहीं, जिस तरह आमतौर पर लोग मान लेते हैं।
पत्नी ने कही ये बात
शोक में डूबे परिवार ने उसी पल अंगदान (organ donation) का फैसला किया। लिवर (liver), दोनों किडनी (kidneys) और कॉर्निया (cornea) दान करने की सहमति दे दी। मरीज की पत्नी ने जो कहा, वो सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। उन्होंने कहा, “वे हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे। जब वे हमारे साथ नहीं रहे, तो लगा कि उनकी अच्छाई किसी और के जीवन में बनी रहे। इसी से मन को कुछ सुकून मिला।”
पंजाब में हुआ पहला शव लिवर प्रत्यारोपण
परिवार की सहमति मिलते ही पीजीआई ने राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम (National Organ Transplant Programme) के तहत पूरी प्रक्रिया शुरू कर दी। मरीज का लिवर राष्ट्रीय नेटवर्क के जरिये पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज यानी पीआईएलबीएस (PILBS) को भेजा गया।
वहां गंभीर हालत में भर्ती एक मरीज को ये लिवर लगाया गया और ट्रांसप्लांट (transplant) सफल रहा। खास बात ये कि यह पीआईएलबीएस का पहला कैडेवर लिवर ट्रांसप्लांट (cadaver liver transplant) बना। पंजाब के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिहाज से देखें तो ये बड़ी उपलब्धि है।
दो को आंखों की रोशनी, दो को किडनी
पीजीआई में ही दोनों किडनी का ट्रांसप्लांट किया गया। अंतिम अवस्था के गुर्दा रोगियों (end-stage renal disease patients) को इससे नई जिंदगी मिल गई। डायलिसिस (dialysis) की मशीनों पर निर्भर दो लोग अब सामान्य जीवन जी सकेंगे।
और फिर कॉर्निया… दो नेत्रहीन लोगों को दृष्टि मिली। उनकी दुनिया, जो अंधेरे में थी, फिर से रोशन हो गई।
कुल मिलाकर एक अंगदान, पांच जिंदगियां।
डॉक्टरों ने क्या कहा
पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने दाता परिवार की तारीफ करते हुए कहा, “यह कदम मानवता की बड़ी मिसाल है। अपने शोक के क्षण में भी उन्होंने दूसरों की जिंदगी को प्राथमिकता दी। इस निर्णय से न केवल पांच जिंदगियां बचीं, बल्कि समाज में अंगदान को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी।”
पीजीआई के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (medical superintendent) और रोटो उत्तर (ROTTO North) के नोडल ऑफिसर प्रो. विपिन कौशल ने कहा, “अंगदान सबसे बड़ा उपहार है। इस परिवार ने करुणा को वास्तविक रूप दिया है।”
पीआईएलबीएस के निदेशक डॉ. वीरेन्द्र सिंह ने कहा, “पीजीआई के सहयोग से हमारा पहला शव लिवर प्रत्यारोपण सफल हुआ। यह उपलब्धि पंजाब की प्रत्यारोपण सेवाओं को नई दिशा देगी।”
अंगदान: जरूरत से ज्यादा जागरूकता की दरकार
भारत में हर साल लाखों लोग अंगों की कमी से मर जाते हैं। लिवर, किडनी, हार्ट जैसे अंगों का इंतजार करते-करते मरीजों की जान चली जाती है। ऐसे में हर अंगदान एक बड़ा कदम है।
लेकिन डर, अंधविश्वास और जानकारी की कमी की वजह से लोग अंगदान से कतराते हैं। जबकि एक व्यक्ति का अंगदान आठ तक लोगों की जान बचा सकता है।
हरियाणा के इस परिवार ने साबित कर दिया कि सबसे बड़ा दान जीवनदान है। और जीवनदान सिर्फ जीते जी नहीं, मृत्यु के बाद भी दिया जा सकता है।










